छठ पूजा बिहार और उत्तर प्रदेश का प्रमुख लोक-धार्मिक त्योहार है, जो मुख्यतः कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। यह पर्व सूर्य देव और छठी मैया (जिसे उषा भी कहा जाता है
) को समर्पित है और प्रकृति की पूजा का प्रतीक है। छठ पूजा लगभग चार दिनों तक चलती है, जिसमें भक्त पूरे दिन निर्जला व्रत रखते हैं और सूर्य के उदय तथा अस्त के समय पूजा करते हैं।इस पूजा की शुरुआत वैदिक काल से मानी जाती है और इसे सूर्य उपासना का सबसे प्राचीन पर्व बताया गया है। बिहार में इसका विशेष सांस्कृतिक महत्व है और इसे केवल एक पूजा नहीं, बल्कि जीवन के प्रति आस्था और प्रकृति के साथ सामंजस्य का उत्सव माना जाता है
। इस पूजा के दौरान भक्त गंगा, कोसी, पुनपुन जैसी नदियों के किनारे जाकर स्नान करते हैं और सूर्य देव को अर्घ्य (जल अर्पण) देते हैं।छठ पूजा के दौरान लोग बहुत ही साफ-सफाई रखते हैं, उपवास करते हैं और संकल्प के साथ पूजा-अर्चना करते हैं
। पहले दिन ‘नहाय-खाय’ कहा जाता है जहां स्नान और शुद्ध आहार ग्रहण किया जाता है। दूसरे दिन ‘खरना’ होता है जिसमें व्रती दिनभर का उपवास पूरा कर शाम में गुड़ और खीर खाते हैं। तीसरे दिन ‘सांझ का अर्घ्य’ होता है जिसमें सूर्यास्त के समय पूजा होती है। चौथा और अंतिम दिन ‘भोर का अर्घ्य’ होता है
जब सूर्योदय के समय सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है और व्रत तोड़ा जाता है।छठ पूजा का धार्मिक महत्व इसलिए है क्योंकि यह सूर्य देव की ऊर्जा और जीवनदायिनी शक्ति का सम्मान करती है। कहा जाता है कि छठ पूजा से सूर्य देव की कृपा प्राप्त होती है, जीवन में समृद्धि और स्वास्थ्य आता है और सभी बाधाएं दूर होती हैं।
साथ ही छठी मैया की भी पूजा होती है, जो जीवन की देवी मानी जाती हैं।सांस्कृतिक दृष्टि से छठ पूजा एक ऐसा पर्व है जिसमें लोक गीत, नृत्य, और प्रसाद वितरण की परंपरा होती है। ये उत्सव बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में गहरे श्रद्धा और सामूहिक भावना के साथ मनाए जाते हैं। छठ पूजा नदियों, जल, वायु, और सूर्य की पूजा से पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देती है। पानी के निकायों की सफाई और संरक्षण को बढ़ावा देना इस त्योहार का एक महत्वपूर्ण पहलू है।छठ पूजा की महत्ता न केवल धार्मिक है
, बल्कि यह समाज में एकजुटता, परिश्रम, और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है। इस त्योहार में कोई भी अवैध या अनुचित व्यवहार नहीं होता है। यह पूरी तरह से शुद्धता, संयम और आध्यात्मिकता पर आधारित होता है।अतः छठ पूजा बिहार और पूर्वांचल की सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न हिस्सा है
, जो प्रकृति पूजन, सूर्य उपासना और समाजिक एकता का अनूठा संदेश देती है। इसकी प्राचीनता, विधि और भव्यता इसे भारतीय लोक संस्कृतियों में विशेष स्थान दिलाती हैं। यह पूजा केवल धार्मिक कृत्यों का समूह नहीं, बल्कि जीवन के साथ प्रकृति के अटूट संबंध को दर्शाती है, जिसे हर साल लाखों लोग श्रद्धा पूर्वक मनाते हैं।