गोरखपुर के साहसी अधिवक्ता पिंटू साहनी : सहारा–पिन कान कंपनियों में फंसे पैसे को लेकर लगातार संघर्ष
गोरखपुर, संवाददाता।
गोरखपुर की सामाजिक और राजनीतिक धरती पर एक नाम आजकल निरंतर चर्चा में रहता है – अधिवक्ता पिंटू साहनी जी। वे न केवल कानून के गहरे जानकार हैं, बल्कि एक साहसी, ईमानदार और जनहितैषी समाजसेवी के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं। पूर्व लोकसभा प्रत्याशी रहने के बाद भी उनका लक्ष्य केवल राजनीति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वे आम जनता की आवाज़ को मंच और अदालत दोनों जगह उठाने में अग्रणी रहे हैं।
गरीबों और मध्यमवर्गीय परिवारों के हक़ की लड़ाई
गोरखपुर समेत पूर्वांचल के हजारों परिवारों ने सहारा और पिन कान जैसी कंपनियों में अपनी मेहनत की कमाई जमा की थी। बेहतर भविष्य और सुरक्षित निवेश के सपने के साथ किया गया यह भरोसा अब टूटता नज़र आ रहा है। इन कंपनियों के पैसे वापस न मिलने से आम लोग परेशान हैं। किसी की बेटी की शादी अटकी है, किसी का मकान अधूरा पड़ा है, किसी का इलाज रुक गया है। ऐसे कठिन समय में अधिवक्ता पिंटू साहनी इन असहाय परिवारों के लिए एक सहारा बने हैं।
अदालत से लेकर सड़क तक संघर्ष
पिंटू साहनी जी केवल अदालत के भीतर कानूनी लड़ाई लड़ने तक ही सीमित नहीं रहते। वे समय-समय पर धरना, प्रदर्शन, रैली और जनआंदोलन के जरिए भी सरकार और प्रशासन तक जनता की आवाज़ पहुँचाते हैं। उनका कहना है कि जनता का पैसा जनता को हर हाल में लौटाना होगा। यदि सरकार और जिम्मेदार संस्थाएं इस पर गंभीर नहीं हुईं, तो यह जनआक्रोश एक बड़े आंदोलन का रूप लेगा।
पूर्व लोकसभा प्रत्याशी से जनसेवक तक
लोकसभा चुनाव में प्रत्याशी बनने के बाद भले ही वे संसद नहीं पहुँच पाए, लेकिन जनता के दिलों में उन्होंने अपनी जगह बना ली। लोग उन्हें एक ऐसे नेता के रूप में देखते हैं, जो पद या प्रतिष्ठा के लिए नहीं बल्कि जनता के हक और अधिकार की रक्षा के लिए संघर्षरत हैं। यही कारण है कि गोरखपुर और आसपास के क्षेत्रों में पिंटू साहनी की पहचान अब केवल अधिवक्ता तक सीमित नहीं, बल्कि एक जुझारू समाजसेवी और निर्भीक जननायक के रूप में हो चुकी है।
जनता में विश्वास और समर्थन
सहारा और पिन कान कंपनियों में फंसे पैसों को लेकर उनकी मुहिम को आम जनता का भरपूर समर्थन मिल रहा है। पीड़ित लोग उन्हें अपनी आखिरी उम्मीद मानते हैं। पिंटू साहनी जी भी हर मीटिंग और कार्यक्रम में यह भरोसा दिलाते हैं कि उनकी लड़ाई अंत तक चलेगी और एक दिन लोगों को उनका हक ज़रूर मिलेगा।
निष्कर्ष
आज के दौर में जब कई नेता और अधिवक्ता केवल व्यक्तिगत लाभ या दिखावे की राजनीति करते हैं, वहीं पिंटू साहनी जैसे लोग समाज के लिए रोशनी की किरण बनते हैं। वे ईमानदारी, साहस और जनहित की मिसाल हैं। गोरखपुर ही नहीं, पूरे पूर्वांचल की जनता को उनसे बड़ी उम्मीदें हैं कि उनकी मेहनत और संघर्ष के बल पर गरीबों और आम नागरिकों की गाढ़ी कमाई उन्हें वापस मिलेगी।