सहारनपुर/मेरठ। उत्तर प्रदेश में नकली करेंसी से जुड़ा एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने बैंकिंग व्यवस्था और करेंसी चेस्ट की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की सहारनपुर स्थित करेंसी चेस्ट में करोड़ों रुपये की जाली करेंसी मिलने के बाद जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि नकली नोटों को सीधे अलग-अलग रखने के बजाय असली नोटों के बीच बेहद चालाकी से छिपाया गया था।
जांच के दौरान पांच लाख रुपये के एक बंडल में 10 गड्डियां मिलीं, जिनमें से आठ गड्डियां नकली नोटों की बताई जा रही हैं। खास बात यह है कि बंडल की शुरुआत और अंत में असली नोट रखे गए थे, जबकि बीच की गड्डियों में जाली करेंसी छिपाई गई थी। इस तरीके से सामान्य स्तर पर नोटों की जांच के दौरान नकली करेंसी को पकड़ना मुश्किल बनाया गया था।
5 लाख के एक बंडल में आठ गड्डियां नकली
पीएनबी की करेंसी चेस्ट में जांच के दौरान अधिकारियों को जिस तरीके से नकली नोट मिले, उसने जांच टीम को भी चौंका दिया।
500 रुपये के 100 नोटों की एक गड्डी में 50 हजार रुपये होते हैं। ऐसी 10 गड्डियों को मिलाकर पांच लाख रुपये का एक बंडल बनाया जाता है। इसी व्यवस्था का कथित तौर पर फायदा उठाकर असली और नकली नोटों को एक साथ व्यवस्थित किया गया।
जांच में सामने आया कि एक पांच लाख रुपये के बंडल में पहली और आखिरी गड्डी असली थी, जबकि बीच की आठ गड्डियों में जाली नोट पाए गए। इससे यह आशंका मजबूत हुई है कि नकली नोटों को इस तरह पैक किया गया था कि बंडल बाहर से सामान्य दिखाई दे।
ऊपर-नीचे असली, बीच में नकली नोट
जांच अधिकारियों को कुछ ऐसी गड्डियां भी मिली हैं, जिनमें ऊपर और नीचे वास्तविक नोट थे, जबकि बीच में नकली नोट रखे गए थे।
यह तरीका इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यदि कोई व्यक्ति केवल गड्डी के शुरुआती और अंतिम नोट देखकर उसकी जांच करे, तो उसे सब कुछ सामान्य नजर आ सकता है। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस तरह नोटों की अदला-बदली किस स्तर पर हुई और करेंसी चेस्ट तक नकली नोट कैसे पहुंचे।
रिपोर्ट के अनुसार शुरुआती रैक में रखे बंडल सामान्य पाए गए, लेकिन आगे की रैक में नकली नोटों वाली गड्डियां मिलने लगीं। इससे जांच का फोकस केवल नोटों पर नहीं बल्कि उनके पूरे मूवमेंट और रिकॉर्ड पर भी पहुंच गया है।
सामान्य कागज और स्याही से तैयार किए गए नकली नोट
जाली नोटों की गुणवत्ता को लेकर भी जांच में अहम जानकारी सामने आई है। शुरुआती जांच के मुताबिक नकली नोटों को तैयार करने में सामान्य कागज और स्याही का इस्तेमाल किया गया था।
हालांकि, ये नकली नोट कहां तैयार किए गए और इन्हें करेंसी चेस्ट तक किस माध्यम से पहुंचाया गया, इसका अभी खुलासा नहीं हुआ है। जांच एजेंसियां अब इस कड़ी को जोड़ने में जुटी हैं।
यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या नकली नोट बाहर से किसी माध्यम से लाए गए थे या बैंकिंग व्यवस्था के अंदर किसी स्तर पर उनकी अदला-बदली की गई।
17 करोड़ के गबन मामले से जुड़ रहा है मामला
यह पूरा घटनाक्रम पीएनबी की करेंसी चेस्ट से जुड़े करीब 17 करोड़ रुपये के कथित गबन की जांच के बीच सामने आया है।
आरबीआई की टीम ने करेंसी चेस्ट पहुंचकर दस्तावेजों, नोटों की गिनती और बंडलों से संबंधित रिकॉर्ड की जांच की। अधिकारियों और कर्मचारियों से भी कई घंटे पूछताछ की गई। टीम यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कौन-से बंडल किस बैंक शाखा से आए और उनके रिकॉर्ड में क्या दर्ज है।
18 दिन तक चलती रही गुप्त जांच
मामले की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बैंक की करेंसी चेस्ट में नकली नोट मिलने के बाद करीब 18 दिनों तक जांच गोपनीय तरीके से चलती रही।
अधिकारियों को जब नकली नोटों की मौजूदगी और बड़े वित्तीय गड़बड़झाले की आशंका मजबूत लगी, तब पुलिस को तहरीर देकर मामला दर्ज कराया गया। इसके बाद पुलिस ने आरोपियों की तलाश शुरू कर दी।
आरबीआई की टीम ने खंगाले दस्तावेज
मामला सामने आने के बाद भारतीय रिजर्व बैंक की टीम भी सक्रिय हो गई। जोनल कार्यालय से करीब छह अधिकारियों की टीम सहारनपुर पहुंची और सोफिया मार्केट स्थित करेंसी चेस्ट की जांच की।
अधिकारियों ने नोटों की काउंटिंग से जुड़े रिकॉर्ड, बंडलों के दस्तावेज और बैंक शाखाओं से करेंसी चेस्ट तक पहुंचने वाली नकदी का विवरण देखा। कर्मचारियों से भी पूछताछ की गई।
हर दिन करेंसी चेस्ट में आता है करोड़ों का कैश
जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतनी बड़ी मात्रा में नकली करेंसी बैंक की करेंसी चेस्ट तक कैसे पहुंची।
रिपोर्ट के मुताबिक जिले की पीएनबी शाखाओं से रोजाना करीब एक से दो करोड़ रुपये का कैश करेंसी चेस्ट में पहुंचता है। इसके अलावा आरबीआई से भी करेंसी आती है। इतनी बड़ी मात्रा में नकदी के बीच जाली नोटों की पहचान और उनकी आवाजाही का पता लगाना जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है।
पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज खंगालना शुरू किया
मामले में पुलिस ने बैंक के अंदर और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगालनी शुरू कर दी है।
जांच टीम यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि
पिछले दिनों बैंक और करेंसी चेस्ट में कौन-कौन लोग पहुंचे थे।
कर्मचारियों, ग्राहकों और अन्य लोगों की गतिविधियों को भी रिकॉर्ड से मिलाया जा रहा है।
सीसीटीवी से मिलने वाली जानकारी को बैंक के दस्तावेजों और
अन्य सबूतों के साथ मिलाकर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
हर करेंसी चेस्ट की जांच के निर्देश
इतनी बड़ी मात्रा में जाली नोट मिलने के बाद बैंकिंग मुख्यालय स्तर पर भी
सतर्कता बढ़ाई गई है। सभी करेंसी चेस्ट की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।
सहारनपुर जिले में पीएनबी की दो करेंसी चेस्ट बताई गई हैं—एक सोफिया मार्केट और
दूसरी गंगोह में। फिलहाल सोफिया मार्केट वाली करेंसी चेस्ट में लेनदेन रोक दिया गया है और
नकदी से जुड़े काम दूसरी करेंसी चेस्ट के माध्यम से किए जा रहे हैं।
हरियाणा तक पहुंची जांच की आंच
मामले की जांच अब उत्तर प्रदेश से आगे हरियाणा तक पहुंच गई है।
पुलिस की टीमों ने यमुनानगर, जगाधरी और अंबाला समेत कई स्थानों पर दबिश दी है।
रिपोर्ट के मुताबिक आरोपियों में दो बैंक प्रबंधकों के
हरियाणा के यमुनानगर और जगाधरी से संबंध बताए गए हैं।
हालांकि, अभी तक गिरफ्तारी की सफलता नहीं मिली है। पुलिस का कहना है कि
आरोपियों को पकड़ने के लिए टीमें लगातार काम कर रही हैं।
एसआईटी करेगी पूरे मामले की जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच टीम यानी एसआईटी गठित की गई है।
एसआईटी से रोजाना जांच की प्रगति की रिपोर्ट लिए जाने की बात कही गई है।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कथित गबन में कितने लोग शामिल हैं,
नकली नोट कहां तैयार हुए, उन्हें बैंक तक कैसे
पहुंचाया गया और करेंसी चेस्ट में उनकी अदला-बदली किस स्तर पर हुई।
आम लोग कैसे पहचानें 500 का असली नोट?
नकली करेंसी की खबर के बीच आम लोगों के लिए भी
500 रुपये के नोट की सुरक्षा विशेषताओं को जानना जरूरी है।
आरबीआई की जानकारी के मुताबिक 500 रुपये के नोट का आकार 63×150 मिलीमीटर है और
इसका प्रमुख रंग स्टोन ग्रे है। नोट के सामने महात्मा गांधी का चित्र और पीछे लाल किले की तस्वीर होती है।
नोट में वॉटरमार्क, सुरक्षा धागा और अन्य सुरक्षा विशेषताएं भी मौजूद होती हैं।
नोट को रोशनी के सामने रखने पर कुछ सुरक्षा चिह्न दिखाई देते हैं।
सुरक्षा धागे का रंग बदलना भी प्रमुख विशेषताओं में शामिल है। इसके अलावा दृष्टिबाधित
लोगों के लिए नोट पर उभरी हुई पहचान संबंधी विशेषताएं दी गई हैं।
अब जांच में किन सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं?
इस पूरे मामले में कई महत्वपूर्ण सवाल जांच एजेंसियों के सामने हैं:
- नकली नोट करेंसी चेस्ट तक कैसे पहुंचे?
- असली और नकली गड्डियों की अदला-बदली कब हुई?
- पांच लाख के बंडल में नकली गड्डियां किसने लगाईं?
- नकली नोट कहां तैयार किए गए?
- क्या बैंक के अंदर से किसी व्यक्ति ने मदद की?
- कथित 17 करोड़ के गबन में कितने लोग शामिल हैं?
- अन्य करेंसी चेस्ट में भी ऐसी गड़बड़ी तो नहीं हुई?
इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।
निष्कर्ष
सहारनपुर की पीएनबी करेंसी चेस्ट में असली नोटों के बीच नकली करेंसी छिपाए जाने का
खुलासा बैंकिंग व्यवस्था के लिए बेहद गंभीर मामला है। पांच लाख रुपये के एक बंडल में आठ गड्डियों के
जाली निकलने और कई अन्य संदिग्ध बंडल मिलने के बाद जांच का दायरा बढ़ गया है।
आरबीआई की टीम दस्तावेज और रिकॉर्ड खंगाल रही है,
पुलिस सीसीटीवी फुटेज और संदिग्धों की गतिविधियों की
जांच कर रही है तथा एसआईटी पूरे मामले की निगरानी कर रही है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि
करोड़ों की जाली करेंसी बैंक की सुरक्षित मानी जाने वाली करेंसी चेस्ट तक आखिर पहुंची कैसे?
read this post :बाड़ेपार में जानीपुर चौकी प्रभारी के नेतृत्व में वाहन चेकिंग करती पुलिस टीम