Oplus_0
फिशरमैन वर्ल्ड न्यूज़ चैनल की रिपोर्ट रूस ने अमरीकी दबाव को बताया अनुचित, भरोसा जताया भारत-रूस ऊर्जा सहयोग पर
मुख्य बिंदु:
- रूस के वरिष्ठ राजनयिक रोमन बाबुश्किन ने कहा कि अमेरिका द्वारा भारत पर कच्चे तेल की खरीद नहीं करने का दबाव “अनुचित” है. उनका कहना था, “दोस्त ऐसे नहीं करते।”
- बाबुश्किन ने यह स्थिति भारत के लिए “चुनौतीपूर्ण” बताते हुए कहा कि रूस नई दिल्ली के साथ अपना ऊर्जा सहयोग जारी रखने में पूर्ण भरोसा रखता है।
- उन्होंने ध्यान दिलाया कि पश्चिमी देशों द्वारा लगाए जा रहे दंडात्मक उपायों का असर वही भुगतते हैं जो उन्हें लागू कर रहे हैं, और इससे वैश्विक बाज़ार, विशेषकर विकासशील देशों की ऊर्जा सुरक्षा प्रभावित होती है।
- रूस से कच्चे तेल की खरीद को महत्व देते हुए बाबुश्किन ने कहा कि यह भारत के राष्ट्रीय हित और बाजार की गतिशीलता से जुड़ा हुआ निर्णय है।
- के बयान में यह भी शामिल था कि अमेरिकी 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाना गलत रणनीति है और इससे आपूर्ति श्रृंखला, मूल्य निर्धारण, और वैश्विक अस्थिरता की समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
Contextual Background (अन्य स्रोतों से):
- अमेरिका ने जुलाई में भारत पर रूसी तेल खरीद जारी रखने पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाने का आदेश दिया था, जिससे कुल टैरिफ बढ़कर 50% तक पहुंच गया। यह कदम व्यापक कारोबारी प्रभाव डाल रहा है।
- विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि भारत रूसी तेल खरीदना बंद कर देता है, तो उसका वार्षिक तेल आयात बिल 9–11 अरब डॉलर तक बढ़ सकता है।
- अमेरिका की दोहरी नीति पर टिप्पणी करते हुए, ट्रंप प्रशासन ने चीन पर कोई कार्रवाई नहीं की जबकि भारत पर भारी टैरिफ लगाए गए—इसे “मौकापरस्त” और अनुचित नीति बताया गया है।
संक्षेप:
रॉयल बाबुश्किन की टिप्पणियों से स्पष्ट होता है कि रूस भारत के साथ ऊर्जा संबंधों को एक विश्वासपूर्ण, रणनीतिक साझेदारी के रूप में देखता है और अमेरिकी दबाव को अनुचित मानता है। इस बीच भारत भी प्रमुख राष्ट्रीय हितों और ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अपनी खरीद पर टिके रहने का संकेत दे रहा है।