गोरखपुर के मोगलहा इलाके में करंट लगने से युवती की मौत का मामला अब गंभीर प्रशासनिक लापरवाही का उदाहरण बन गया है। इस दुर्घटना के बाद राप्तीनगर के एसडीओ, मेडिकल कॉलेज उपकेंद्र के जेई और राप्तीनगर के एक्सईएन समेत कुल छह कर्मचारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई और निलंबन की सिफारिश की गई है। मामले की जांच के बाद दोषी पाए गए सभी लोगों पर प्रशासन कड़ी कार्यवाही करने की तैयारी में है, जिससे भविष्य में इस प्रकार की घटनाएं न दोहराई जाएं।
घटना का विस्तार
यह घटना 14 सितंबर को हुई थी जब मोगलहा निवासी शिक्षिका शशिभानु मौर्य की 18 वर्षीय बेटी साक्षी उर्फ प्रज्ञा अपने घर की छत पर खड़ी थी। उसी समय वह अचानक बिजली के करंट की चपेट में आ गई और मौके पर ही उसकी मृत्यु हो गई। परिवार के लोगों ने यह जानकारी दी कि छत पर खंभे और उससे जुड़े तारों की वजह से वहां करंट फैल गया था। साक्षी के छूते ही उसे जोरदार झटका लगा, जिससे कुछ ही क्षण में उसकी जान चली गई। हादसे के बाद परिजनों में मातम छा गया और क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। इस घटना के तुरंत बाद इलाके के लोग इकट्ठा हो गए और प्रशासन को इस लापरवाही के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की माँग शुरू कर दी।
प्रशासनिक कार्यवाही
घटना के बाद प्रदेश व जिला प्रशासन ने गंभीरता दिखाते हुए जाँच टीम का गठन किया। अधीक्षण अभियंता ग्रामीण वितरण मंडल द्वितीय, दीपक कुमार सिंह के नेतृत्व में गठित टीम ने घटना स्थल का निरीक्षण करते हुए हर पहलू की बारीकी से जाँच की। टीम के साथ आए अन्य अधिकारियों ने भी स्थल पर उपस्थित लोगों से बातचीत की और घटना की सटीक जानकारी जुटाई। जाँच रिपोर्ट में एसडीओ, जेई, एक्सईएन सहित छह संचालित कर्मचारियों की लापरवाही और गैर-जिम्मेदाराना रवैये की पुष्टि हुई। जांच टीम के अनुसार, अगर इन अधिकारियों और कर्मचारियों ने समय रहते तारों की मरम्मत कर दी होती या आवश्यक सुरक्षा इंतजाम किए होते, तो साक्षी की जान बचाई जा सकती थी।
जांच और रिपोर्ट
जाँच रिपोर्ट तैयार होने के बाद, पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक को यह रिपोर्ट सौंपी गई। रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि राप्तीनगर के एक्सईएन, एसडीओ और मेडिकल कॉलेज उपकेंद्र के जेई के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। वहीं, आउटसोर्सिंग स्टाफ के रूप में कार्य कर रहे छह कर्मचारियों को तत्काल निलंबित किए जाने की सिफारिश भी की गई है। इनके अलावा, अन्य दोषी कर्मचारियों में राहुल गोंड, विशाल मिश्रा, गोरिक्षनाथ, अंशुमान यादव और जयप्रकाश यादव का नाम भी शामिल है, जिनपर जल्द ही विभागीय कार्रवाई की जा सकती है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, अनुशासनात्मक कार्यवाही की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है और दोषी पाए जाने पर सभी पर नियमानुसार सख्त कदम उठाए जाएंगे।
सामाजिक और प्रशासनिक प्रभाव
इस घटना ने न सिर्फ परिवार, बल्कि पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। इलाके के लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता और नाराजगी दोनों ही बढ़ गई है। लोगों ने इस बात पर जोर दिया है कि विद्युत विभाग द्वारा लापरवाही लगातार दिख रही है, जिसकी वजह से आम लोग दिन-प्रतिदिन हादसों का शिकार हो रहे हैं। स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से इन घटनाओं को रोकने के लिए जल्द से जल्द सुरक्षा उपाय लागू करने, पुराने व क्षतिग्रस्त तारों और खंभों को बदलवाने तथा नियमित निरीक्षण की मांग की है। उनके अनुसार, अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई न की गई तो ऐसा हादसा फिर हो सकता है।
परिवार की स्थिति और समाज का रुख
साक्षी की मृत्यु से उसके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। उसका परिवार गहरे सदमे में है और उन्हें न्याय की उम्मीद है। वहीं समाज के लोग इस बात को लेकर चिंतित हैं कि आखिर ऐसी घटनाएँ कब तक होती रहेंगी। कई सामाजिक संगठनों ने पीड़ित परिवार से मिलकर दुख जताया और प्रशासन से मांग की कि सभी दोषियों को दंडित किया जाए। महिलाओं की सुरक्षा और नागरिकों की जान-माल की रक्षा के लिए, लोगों को अब जरूरी सरकारी पहलों पर भी निगाहें हैं। कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इस घटना को प्रदेश की विद्युत व्यवस्था की कमजोरी करार दिया है।
प्रशासन की जवाबदेही
प्रशासन ने यह आश्वासन दिया है कि भविष्य में इस तरह की दुर्घटनाएं न हों, इसके लिए सुरक्षा मानकों को कड़ाई से लागू किया जाएगा। दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई कर मिसाल पेश की जाएगी, जिससे अन्य लोग भी जिम्मेदारी से अपना काम करें। विद्युत विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि सभी खुले तारों व खंभों की शीघ्रता से जांच कर मरम्मत कराना सुनिश्चित किया जाए। साथ ही, विभागीय अधिकारियों को प्रतिमाह क्षेत्र निरीक्षण की रिपोर्ट देने का आदेश मिला है।
निष्कर्ष
करंट लगने से युवती की मौत के मामले ने विद्युत विभाग की लापरवाही व प्रशासनिक जिम्मेदारी पर बड़ा सवाल खड़ा किया है। साक्षी की जान गई, लेकिन इस घटना ने पूरे प्रशासन सिस्टम को झकझोर दिया। अब देखना होगा कि दोषियों पर प्रभावी कार्रवाई होती है या वर्षों तक फाइलों में ही मामला दबा रह जाता है। यदि प्रशासन अपनी जिम्मेदारी निभाता है और सख्ती बरतता है, तो भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति से रोका जा सकेगा और आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी