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दवा ही नहीं अब जांच में भी माफिया… महंगे दामों पर बाहर अल्ट्रासाउंड करा रही एजेंट
जिला महिला अस्पताल : निजी सेंटर की एजेंट बहकाकर ले जाती हैं, महंगे दाम पर करा देती हैं जांच
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
माफिया सक्रिय हो चुके हैं। जिला महिला अस्पताल में जांच के लिए भेजी गईं गर्भवती और अन्य महिलाएं सीधे निजी सेंटरों के चंगुल में फंस जा रही हैं। यह सब एजेंटों के माध्यम से हो रहा है। बाहर महंगे दाम पर अल्ट्रासाउंड कराने का खेल धड़ल्ले से चल रहा है।
महिला अस्पताल के एक अल्ट्रासाउंड कक्ष में डॉक्टर की तैनाती है। वहां एक दिन में औसतन 40 से 50 मरीजों का अल्ट्रासाउंड होता है। यहां सिर्फ़ 12 बजे तक ही पर्ची बनती है। इसके बाद आने वाली गर्भवती और अन्य महिलाएं सीधे एजेंटों के झांसे में आ जाती हैं।
बुधवार दोपहर 12:35 बजे जिला महिला अस्पताल पहुंची रिपोर्टिंग टीम ने देखा कि परिसर गेट के पास खड़ी दो एजेंट ग्रामीण महिलाओं को जांच कराने के नाम पर अस्पताल के बाहर ले जा रही थीं। उन्होंने बताया कि अस्पताल में मशीन खराब है और यहां जांच नहीं हो सकती।
झांसे में लेकर थमाती हैं कार्ड
सूत्रों ने बताया कि अल्ट्रासाउंड सेंटर की एजेंट महिलाओं से कहती हैं कि अस्पताल में भीड़ और मशीन खराब होने की वजह से जांच नहीं हो पाएगी। इसके बाद वे पर्ची और अन्य रिपोर्ट लेकर महिला को बाहर निजी सेंटर में ले जाती हैं।
बताया गया कि रोज़ाना 40 मरीजों की ही जांच होने से कई महिलाएं लौट जाती हैं। इसका फायदा उठाकर एजेंट सक्रिय हो गई हैं। अस्पताल प्रशासन की लापरवाही से बाहर सेंटरों पर अवैध तरीके से अल्ट्रासाउंड का खेल चल रहा है।
मरीजों को झांसे में लेने के लिए एजेंट खुद को बताती हैं आशा कार्यकर्ता
जिला महिला अस्पताल में निजी अल्ट्रासाउंड सेंटर की एजेंट सक्रिय हैं। ये खुद को आशा कार्यकर्ता बताकर अल्ट्रासाउंड कराने आईं ग्रामीण महिलाओं को झांसे में ले लेती हैं और फिर बाहर निजी सेंटरों पर ले जाकर जांच कराती हैं।
केस 1
खोराबार ब्लॉक की रहने वाली रीना देवी गर्भवती हैं। जांच के लिए सुबह 9 बजे महिला अस्पताल आईं। नंबर चलते-चलते जब उनका नंबर नहीं आया तो रिपोर्टिंग टीम ने देखा कि उसी समय एजेंट उनके पास गई और गलत रिपोर्टिंग करते हुए कहा कि मशीन खराब है। फिर उन्हें बाहर ले जाकर निजी सेंटर पर अल्ट्रासाउंड करा दिया।
केस 2
सहजनवा ब्लॉक की रहने वाली सुषमा देवी सुबह 11 बजे अस्पताल आईं। पर्ची बनवाने के बाद जब नंबर नहीं आया तो एजेंट ने उन्हें समझाया कि जांच यहां नहीं होगी। इसके बाद उन्हें बाहर ले जाकर अल्ट्रासाउंड करा दिया।
22 अगस्त को प्रकाशित खबर
“एम्स गेट पर सक्रिय है माफिया… मरीजों को बाहर भेजकर हो रही दलाली।”
👉 इस खबर में साफ है कि जिला महिला अस्पताल में जांच और दवाओं के नाम पर माफिया का नेटवर्क गहराई तक पहुंच चुका है। प्रशासन की ढिलाई से महिलाओं को ठगा जा रहा है और महंगे दाम पर बाहर अल्ट्रासाउंड कराया जा रहा है।