कन्हैया कुमार की 36 मिनट की प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार पर तीखे सवाल: NEET, पेपर लीक, NTA से लेकर युवाओं और लोकतंत्र तक उठाई आवाज

नई दिल्ली। कांग्रेस नेता और NSUI प्रभारी कन्हैया कुमार ने कांग्रेस कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान देश की शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक, NTA की कार्यप्रणाली, युवाओं के भविष्य और लोकतांत्रिक संस्थाओं की जवाबदेही जैसे कई मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। करीब 36 मिनट से अधिक चली बातचीत में कन्हैया कुमार ने सरकार से सीधे सवाल किए और कहा कि देश के युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक बयानबाजी के बजाय गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

कांग्रेस की आधिकारिक वेबसाइट पर भी कन्हैया कुमार की AICC कार्यालय, 24 अकबर रोड, नई दिल्ली में मीडिया को संबोधित करने की जानकारी उपलब्ध है।

शिक्षा व्यवस्था को लेकर कन्हैया कुमार का सरकार पर हमला

कन्हैया कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत देश की शिक्षा व्यवस्था और विद्यार्थियों की समस्याओं को लेकर की। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में देश के सामने कई बड़े राजनीतिक और सामाजिक मुद्दे हैं, लेकिन विद्यार्थियों और युवाओं के भविष्य से जुड़े सवालों पर पर्याप्त चर्चा जरूरी है।

उन्होंने विशेष रूप से प्रतियोगी परीक्षाओं में होने वाली गड़बड़ियों और पेपर लीक के मामलों को गंभीर विषय बताया। उनके मुताबिक, परीक्षा प्रणाली में बार-बार सामने आ रही समस्याएं सीधे तौर पर लाखों विद्यार्थियों के भविष्य को प्रभावित करती हैं।

NEET और पेपर लीक पर उठाए सवाल

प्रेस कॉन्फ्रेंस में NEET परीक्षा का मुद्दा प्रमुखता से सामने आया। कन्हैया कुमार ने पेपर लीक की घटनाओं और उसके बाद विद्यार्थियों को होने वाली परेशानियों पर सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की।

उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षा में पेपर लीक होता है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी तय होगी? उनका कहना था कि परीक्षा देने वाला विद्यार्थी व्यवस्था की गलती का खामियाजा क्यों भुगते।

कन्हैया कुमार ने विद्यार्थियों से भी अपील की कि किसी भी व्यवस्था की कमी या असफलता के कारण वे अपने जीवन को खत्म करने जैसा कदम न उठाएं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को अपने अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठानी चाहिए।

NTA की कार्यप्रणाली पर भी सवाल

कन्हैया कुमार ने National Testing Agency यानी NTA की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने परीक्षा कराने वाली संस्थाओं की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर चिंता जाहिर की।

उनका तर्क था कि जिस संस्था पर करोड़ों विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ी परीक्षाएं कराने की जिम्मेदारी है, उसकी कार्यप्रणाली पर यदि लगातार सवाल उठते हैं तो सरकार को उसका जवाब देना चाहिए।

उन्होंने परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने, जिम्मेदारी तय करने और दोषियों पर कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया।

शिक्षा मंत्री की जवाबदेही का मुद्दा

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कन्हैया कुमार ने शिक्षा मंत्रालय की जवाबदेही को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने केंद्र सरकार से पूछा कि लगातार परीक्षा संबंधी विवाद सामने आने के बावजूद जिम्मेदारी तय क्यों नहीं की जा रही है।

उन्होंने शिक्षा मंत्री से अपने मंत्रालय से जुड़े सवालों का जवाब देने और परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।

युवाओं के मानसिक दबाव का भी मुद्दा उठाया

कन्हैया कुमार ने युवाओं और विद्यार्थियों पर बढ़ते दबाव को भी गंभीर मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले लाखों छात्र कई वर्षों तक मेहनत करते हैं। ऐसे में परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी उनके पूरे करियर को प्रभावित कर सकती है।

उन्होंने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि व्यवस्था की गलती का बोझ अपने ऊपर न लें। उनका कहना था कि किसी भी समस्या का समाधान संघर्ष और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाने में है।

सवाल पूछने के अधिकार को लेकर भी बोले

कन्हैया कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में लोकतंत्र और सवाल पूछने के अधिकार को भी महत्वपूर्ण विषय बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार से सवाल पूछने वालों को कई बार अलग-अलग तरह के आरोपों का सामना करना पड़ता है।

उनका कहना था कि लोकतंत्र में विपक्ष, मीडिया और नागरिकों की भूमिका सरकार से सवाल पूछना और जवाबदेही सुनिश्चित करना है।

उन्होंने कहा कि सरकार से सवाल पूछना देश के खिलाफ होना नहीं है। बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सवाल और जवाब दोनों जरूरी हैं।

मीडिया की भूमिका पर भी कन्हैया कुमार की टिप्पणी

प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने मीडिया की भूमिका का भी उल्लेख किया। कन्हैया कुमार ने कहा कि देश के सामने कई गंभीर मुद्दे हैं, जिन पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए।

उन्होंने मीडिया से युवाओं, शिक्षा, रोजगार और परीक्षा व्यवस्था जैसे मुद्दों को प्राथमिकता देने की अपील की।

विश्वगुरु’ के दावे पर भी निशाना

कन्हैया कुमार ने सरकार के विकास और विश्वगुरु बनने के दावों पर भी सवाल उठाया। उन्होंने तंज करते हुए कहा कि यदि देश अपने विद्यार्थियों के लिए एक परीक्षा भी पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से नहीं करा पा रहा है तो शिक्षा व्यवस्था की स्थिति पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

उनका कहना था कि किसी देश की वास्तविक मजबूती उसके युवाओं, शिक्षा व्यवस्था और संस्थानों की विश्वसनीयता से तय होती है।

लोकतांत्रिक संस्थाओं की जवाबदेही पर जोर

कन्हैया कुमार ने कहा कि देश की व्यवस्था में विधायिका, न्यायपालिका, कार्यपालिका और मीडिया सभी की अपनी भूमिका है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र तभी मजबूत होगा जब सभी संस्थाएं अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करें।

उन्होंने विपक्ष की भूमिका को भी इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण बताया और कहा कि छात्रों और युवाओं से जुड़े सवाल संसद और सड़क दोनों जगह उठाए जाएंगे।

वोटर और चुनावी प्रक्रिया का मुद्दा भी उठा

प्रेस कॉन्फ्रेंस के सवाल-जवाब सत्र में चुनावी प्रक्रिया और वोटर लिस्ट से जुड़े मुद्दों पर भी सवाल पूछे गए। इस पर कन्हैया कुमार ने विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे चुनावी पारदर्शिता के सवालों का बचाव किया।

उन्होंने कहा कि चुनाव से जुड़े किसी भी सवाल का जवाब तथ्यों और पारदर्शी प्रक्रिया के जरिए दिया जाना चाहिए।

कर्नाटक के राजनीतिक घटनाक्रम पर क्या कहा?

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कर्नाटक से जुड़े राजनीतिक सवाल पर भी कन्हैया कुमार से सवाल किया गया। उन्होंने इसे कांग्रेस का आंतरिक विषय बताते हुए कहा कि पार्टी अपने स्तर पर लोकतांत्रिक तरीके से निर्णय लेगी।

उन्होंने इस दौरान कहा कि उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि देश किस दिशा में आगे बढ़ रहा है और युवाओं तथा आम लोगों से जुड़े मुद्दों पर सरकार की जवाबदेही कैसे तय होगी।

कन्हैया कुमार का मुख्य संदेश क्या रहा?

पूरी प्रेस कॉन्फ्रेंस को देखा जाए तो कन्हैया कुमार का मुख्य फोकस शिक्षा, परीक्षा प्रणाली, पेपर लीक, युवाओं का भविष्य, सरकारी जवाबदेही और लोकतंत्र में सवाल पूछने के अधिकार पर रहा।

उन्होंने केंद्र सरकार से परीक्षा व्यवस्था को पारदर्शी बनाने, जिम्मेदारी तय करने और विद्यार्थियों की समस्याओं पर गंभीरता से कार्रवाई करने की मांग की।

कन्हैया कुमार ने यह भी कहा कि देश के युवाओं के सवालों को दबाया नहीं जाना चाहिए। उनके मुताबिक, शिक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दे किसी एक राजनीतिक दल के नहीं बल्कि पूरे देश के भविष्य से जुड़े विषय हैं।

निष्कर्ष

कन्हैया कुमार की इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के साथ-साथ शिक्षा और परीक्षा प्रणाली से जुड़े कई गंभीर मुद्दे सामने आए। NEET, पेपर लीक, NTA की कार्यप्रणाली, विद्यार्थियों का मानसिक दबाव, शिक्षा मंत्रालय की जवाबदेही और लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका उनके संबोधन के प्रमुख विषय रहे।

हालांकि, प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाए गए राजनीतिक आरोपों को कन्हैया कुमार और कांग्रेस के दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अलग-अलग मामलों के आधिकारिक रिकॉर्ड और जांच के आधार पर ही की जा सकती है।

ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि परीक्षा व्यवस्था में बार-बार उठ रहे सवालों का स्थायी समाधान कब होगा और विद्यार्थियों को ऐसी व्यवस्था कब मिलेगी, जिस पर वे पूरी तरह भरोसा कर सकें?